Wednesday, October 10, 2018

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

बिहार सांस्कृतिक मंड वडोदरा में बसे हुए उत्तर भारतीयों की एक संस्था है. इस संस्था के पूर्व अध्यक्ष डीएन ठाकुर का ये मानना है कि इस घटना के पीछे राजनीतिक हाथ है.
उनका कहना है कि उत्तर भारतीयों पर निशाना साध कर राजनीति से जुड़े लोग अपना व्यक्तिगत राजनैतिक हित साधने में लगे हैं.
"मैं 1983 से वडोदरा शहर में रह रहा हूं. हमारी संस्था के साथ 20 हज़ार लोग जुड़े हैं. गुजरात में हमें बहुत सहयोग मिला है. छठ पूजा में कम से कम एक लाख लोग हमारे साथ जुड़ते हैं जिसमें से सबसे बड़ा सहयोग गुजरातियों से मिलता है. नई बनती इमारतों से लेकर पुल निर्माण तक में हमारे लोगों ने योगदान दिया है. हमने गुजरात को बहुत कुछ दिया है और गुजरात से भी हमें बहुत प्रेम मिला है. एक घटना के कारण तमाम दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाना ग़लत है."
समाजशास्त्रियों का मानना है कि राज्य की स्थापना से लेकर अब तक राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में यूपी-बिहार के लोगों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
समाजशास्त्री डॉक्टर गौरांग जानी का कहना है, "राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में यूपी-बिहार के लोगों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है. अहमदाबाद में एक समय 80 से ज़्यादा कपड़े के मिल हुआ करते थे और इन मिलों में दूसरे राज्यों के लोग काम करते थे. अहमदाबाद में जब ये मिल बंद हुए तब सूरत में पावरलूम उद्योग शुरू हुआ और इन कारखानों में दूसरे राज्य के लोगों का अहम योगदान रहा है. इस तरह की घटना से राज्य की सामाजिक समरसता पर दाग लगा है."
जानी का कहना है कि राज्य में एक तरफ देश के रजवाड़ों को साथ लाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का लोकार्पण किया जाएगा, दूसरी तरफ देश के दूसरे राज्य के लोगों पर हमले हो रहे हैं, इससे जो संदेश पूरे देश में गया है उस पर विचार करना चाहिए. सरदार पटेल एकता और अखंडता के हिमायती थे और गुजरात में इस तरह की घटना का होना दुखद है.
जानी कहते हैं, "गुजरात में दूसरे राज्य के रहने वाले वैसे तो देश के नागरिक हैं और प्रवासी नियमों के तहत उन्हें यह अधिकार है कि वो देश के किसी भी कोने में जा कर बस सकते हैं और नौकरी-पेशा कर सकते हैं. सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो इन्हें सुरक्षा मुहैया कराए और उसकी यह भी ज़िम्मेदारी है कि वो उनमें सुरक्षा की भावना पैदा करे."
बिहार के एक शख़्स ने कथित तौर पर 14 साल की एक लड़की से बलात्कार किया जिसके बाद हिम्मतनगर सहित राज्य के दूसरे शहरों में रहने वाले यूपी-बिहार के लोगों पर हमले हो रहे हैं.
मामले में बिहार के रहने वाले रविंद्र साहू को अभियुक्त बनाया गया है. हिंसा की घटना के बाद राज्य के आठ ज़िलों में यूपी-बिहार के लोगों पर हमले हुए हैं. पुलिस का कहना है कि इस घटना को लेकर 57 केस दर्ज किए गए हैं और 361 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
इन इलाक़ों में दहशत का माहौल है और सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज इस माहौल में घी डालने का काम कर रहे हैं. इसी डर के माहौल में अपनी सुरक्षा के लिए बिहार-यूपी के लोग राज्य छोड़ कर अपने घर वापस लौट रहे हैं.